2008 में जब बीसीसीआई ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत की और इसका पहला सीजन खेला गया, तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि एक दशक के सफर में ये लीग इतनी बड़ी हो जाएगी कि खिलाड़ी अपने देश के लिए क्रिकेट खेलने की बजाय इसे ही चुनेंगे.

साल 2007 के 50 ओवरों के वर्ल्ड कप में जब टीम इंडिया की शर्मनाक हार हुई, तब दरवाजे पर क्रिकेट का एक नया फॉर्मेट दस्तक दे रहा था. टी20 का वर्ल्ड कप कुछ महीनों की दूरी पर था, टीम इंडिया के सीनियर खिलाड़ियों ने खुद को इससे अलग रखने की बात कही. महेंद्र सिंह धोनी कप्तान बन गए और एक युवाओं से भरी टीम ने दुनिया को जीत लिया. क्रिकेट को धर्म मानने वाले भारत के लिए टी20 फॉर्मेट को अपनाने का ये पहला बड़ा मौका था.

ठीक एक साल बाद भारत में कुछ ऐसा हुआ, जिसने क्रिकेट की दुनिया, खिलाड़ियों की किस्मत, खेल के तरीके… हर किसी को बदलकर रख दिया. 2008 में जब बीसीसीआई ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत की और इसका पहला सीजन खेला गया, तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि एक दशक के सफर में ये लीग इतनी बड़ी हो जाएगी कि खिलाड़ी अपने देश के लिए क्रिकेट खेलने की बजाय इसे ही चुनेंगे.

दरअसल, 2007 में एक प्राइवेट लीग शुरू हुई थी इंडियन क्रिकेट लीग (ICL), इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के क्रिकेटर खेलते थे. लेकिन बीसीसीआई को ये नामंजूर थी. इसी दौरान सितंबर 2007 में बीसीसीआई ने आईपीएल का ऐलान किया. ललित मोदी, जिन्हें IPL का जनक कहा जाता है, इस फॉर्मूले को लेकर दुनिया के सामने आए.

ललित मोदी ने सचिन, सौरव, राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले जैसे चेहरों के साथ आईपीएल लाने की बात कही. फरवरी 2008 में आईपीएल के लिए बोली का सिलसिला शुरू हुआ. जब खिलाड़ियों की बोली की बात सामने आई, तो देश में बड़ा बवाल हुआ. पूर्व क्रिकेटर से लेकर राजनेताओं तक हर किसी ने खिलाड़ियों की बिक्री पर सवाल खड़े कर दिए. लेकिन ललित मोदी ने किसी की नहीं सुनी. आईपीएल का आगाज हुआ, अप्रैल 2008 में इसका पहला सीज़न खेला गया.

आईपीएल का पहला ही मैच धमाकेदार रहा, जब ब्रैंडन मैक्कुलम (158*) ने शतक जड़ दिया. फिर क्या पूरा सीज़न सुपरहिट गया. अंदाजा इसी बात से लगाइए कि साल 2007 में बीसीसीआई का कुल कमाई 225 करोड़ रुपये थी, लेकिन 2008 के आईपीएल-1 से ही बीसीसीआई को 300 करोड़ की कमाई हुई. यानी खेल और पैसा, दोनों मोर्चे पर आईपीएल हिट निकल गया.

क्यों सफल हो पाया आईपीएल?

हिन्दुस्तान में क्रिकेट को धर्म माना जाता है, ये हर कोई जानता है. जब ऐसे देश में इस तरह की बड़ी लीग देखने को मिली, जहां हर देश का बड़ा क्रिकेटर एक-दूसरे के साथ खेल रहा था और खिलाफ भी. ये फॉर्मूला इंडियन फैंस को भा गया और आईपीएल हिट हो गया.

सबसे बड़ा कारण ये भी रहा कि 2000 के शुरुआती दशक में ही बीसीसीआई दुनिया की क्रिकेट का बॉस बन चुका था. क्रिकेट में सबसे अधिक पैसा BCCI के पास ही है, ऐसे में दुनिया का कोई बोर्ड, कोई खिलाड़ी कैसे इनकार कर सकता था. क्योंकि खेलने का मौका, पैसा और बड़ी स्टेज मिल पा रही थी.

आईपीएल हिट होने की सबसे खास बात ये रही कि यहां आपको इंटरनेशनल, देशी क्रिकेटर्स के अलावा उन खिलाड़ियों का खेल देखने को मिलता है, जिन्हें आप जानते भी नहीं. और एक ही रात में वो दुनिया में बड़े स्टार के तौर पर उभरकर आते हैं.

साथ ही हर साल में सिर्फ दो महीने ऐसे होते हैं, जहां आपको पता है कि आप अपने काम से फ्री होकर देर शाम को तीन घंटे का मैच देख सकते हैं. और ये हर दिन हो रहा है, बिना किसी ब्रेक के. इसका फायदा ये भी है कि प्राइम टाइम पर टीवी रेटिंग्स के मामले में आईपीएल सुपरहिट साबित हुआ.

जमीन से उठाकर स्टार बनाने वाला मंच

करीब डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाला देश जहां हर कोई क्रिकेट एक्सपर्ट बना होता है और क्रिकेट टीम में जाना चाहता है. ऐसी जगह पर आईपीएल सबसे बड़ी खिड़की बनकर आया. क्योंकि आईपीएल में कई टीमें हैं, इनसे क्लब क्रिकेट को बढ़ावा मिला फिर चाहे शहर हो या राज्य की टीमें. इसी के साथ मौका मिला, लोकल खिलाड़ियों को आगे आने का.

जो खिलाड़ी अलग-अलग लीग में अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे और टीम इंडिया में जगह नहीं बना पा रहे थे. उनके लिए आईपीएल एक खिड़की बना. जहां आपको अपनी ताकत सबसे बड़े मंच पर दिखाने का मौका मिलता है.

आईपीएल के ऑक्शन के वक्त आपने कई ऐसी कहानियां सुनी होंगी, जिसमें किसी ऑटो वाले का बेटा, किसी मजदूर का बेटा, कोई झोपड़ी में रहने वाला, कम पढ़ा-लिखा खिलाड़ी अचानक स्टार बनता है और उसके लिए टीमें करोड़ों रुपये की बोली लगा देती है. शायद उस अनजान खिलाड़ी को टीम इंडिया में आने के लिए काफी मशक्कत करनी होती, लेकिन आईपीएल उसके लिए ये खिड़की बनती है, जो बड़ा मंच देती है.

मोहम्मद सिराज, संजू सैमसन, हार्दिक पंड्या, क्रुणाल पंड्या, जसप्रीत बुमराह, टी. नटराजन, ऋषभ पंत, दीपक चाहर, शार्दुल ठाकुर, वॉशिंगटन सुंदर. टीम इंडिया की मौजूदा स्क्वॉड के ये वो नाम हैं, जो आईपीएल से ही स्टार बने हैं और आज टीम इंडिया में जगह बनाए हुए हैं. IPL ना होता तो शायद इतनी बड़ी संख्या में टीम इंडिया को युवा फौज ढूंढने में मुश्किल होती.

कम बैक करने का सबसे बड़ा मंच IPL

ऐसा नहीं है कि आईपीएल सिर्फ नए खिलाड़ियों को ही मौका देता है, जो खिलाड़ी टीम से बाहर चल रहा है या उसे मौका नहीं मिल रहा है, उसके लिए भी आईपीएल वरदान साबित होता है. टीम इंडिया के कई ऐसे खिलाड़ी रहे, जो IPL में चमककर फिर से टीम में वापसी कर पाए.

आशीष नेहरा ने जब एक आईपीएल का शानदार सीजन दिया, तो उन्हें 2016 टी20 वर्ल्डकप टीम में शामिल किया गया. दिनेश कार्तिक का आईपीएल में शानदार प्रदर्शन उन्हें टीम इंडिया में लेकर आया था, जहां उन्होंने श्रीलंका में शानदार सीरीज को जिताया था. इसके लिए डोमेस्टिक क्रिकेट में लगातार अच्छा करने वाले सूर्यकुमार यादव भी आईपीएल की बदौलत ही टीम इंडिया में वापसी कर पाए.

देसी नहीं विदेशी स्टार्स की भी बल्ले-बल्ले

इंडियन प्रीमियर लीग में विदेशी स्टार्स भी बड़ी पावर बनकर उभरते हैं. क्रिस गेल, ड्वेन ब्रावो, पोलार्ड, एबी डिविलिर्स जैसे स्टार्स तो वो हैं, जिन्होंने आईपीएल के दम पर भारत में अपने फैनबेस को मजबूत किया है. इसके अलावा कई ऐसे युवा खिलाड़ी भी हैं, जो आईपीएल में चमककर अपने देश की टीम में शामिल हो पाए हैं.

डेविड मिलर, मैक्सवेल, सैम कुरेन जैसे कई नाम हैं, जिन्हें आईपीएल के परफॉर्मेंस ने अपने देश में खेलने का मौका दिया और उन्हें तवज्जो दिलवाई. यही एक कारण है कि आज कई देश अपने खिलाड़ियों को आईपीएल में रोकने से मना नहीं करते हैं. इस साल का आईपीएल इसलिए भी खास है क्योंकि भारत में इससाल के अंत में टी20 वर्ल्डकप हो रहा है, तो क्रिकेट कंट्रीज़ अपने खिलाड़ियों को यहां पर वक्त बिताने का मौका दे रही हैं.

क्रिकेट का सबसे बड़ा चांस आईपीएल

आज आईसीसी को अपने इंटरनेशनल शेड्यूल में दो महीने का गैप इसलिए देना पड़ता है, क्योंकि अधिकतर देशों के खिलाड़ी आईपीएल में हिस्सा लेना चाहते हैं. ऋषभ पंत जैसा युवा खिलाड़ी कम उम्र में किसी टीम की कप्तानी करेगा, रोहित शर्मा, अंजिक्य रहाणे, केएल राहुल, श्रेयस अय्यर की कप्तानी का टेस्ट भी आईपीएल में ही हुआ और लोगों की उनकी काबिलियत का पता चल पाया.

सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, रिकी पोटिंग, महेला जयवर्धने, कुमार संगकारा जैसे दिग्गज अभी भी क्रिकेट से जुड़े हुए हैं, जो आईपीएल का हिस्सा हैं. ऐसे में सिर्फ 13 साल के वक्त में आईपीएल ने दुनिया के क्रिकेट में अपनी जगह ऐसी बना ली है, जिससे कोई मुंह नहीं मोड़ सकता है. यही कारण है कि ना सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के क्रिकेट के लिए आईपीएल एक टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ है.