जयपुर.

विज्ञापनों के जरिए चलाए जा रहे अभियानों और मीडिया सालों से हमें इस बात पर आगाह करता आ रहा है कि हमारे घर, शरीर और दफ्तर लाखों-करोड़ों रोगाणुओं का घर बन चुके हैं इसलिए हमें अपनी सुरक्षा के लिए एंटीबैक्टीरिया केमिकल्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। नए अध्ययन में सामने आया है कि साबुन, शैम्पू, कॉस्मेटिक्स, कुकवेयर, योगा मैट्स, माउथ वॉश, और टूथपेस्ट में भी हानिकारक कैमिकल्स होते हैं जो सेहत के लिहाज से हमारे लिए सुरक्षित नहीं हैं। जानवरों में इनका परीक्षण करने पर उनमें आंतों में सूजन, ब्रहदान्त्र कैंसर और हार्मोंस के प्रभावित होने जैसे लक्षण सामने आए हैं। इससे पार पाने का केवल एक ही तर्कसंगत रास्ता है और वो है कि हम इस समस्या को एक ही नजरिए से देखें और इसके अच्छे-बुरे प्रभाव के बारे में सोचें। मीडिया की खबरों में इस तरह की रिपोट्र्स कम ही प्रकाशित की जाती हैं। लोगों को जागरूक करने की बजाय बाजार की प्रतिस्पर्धा में टीवी चैनल और एडवरटाइजिंग एजेंसी विभिन्न ब्राण्ड्स की पब्लिसिटी करने में लग जाती हैं।

रोगाणुओं से ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता जिम्मेदार
सौंदर्य प्रसाधनों में मिलाया जाने वाला ट्राइक्लोसन नामक रसायन भले ही हमारे शरीर के रोगाणुओं को नष्ट करता है लेकिन ये भी सच है कि केवल रोगाणुओं के सीधे संपर्क में आने भर से कोई व्यक्ति बीमार नहीं हो सकता। क्योंकि अगर ऐसा न होता तो इस केमिकल का उपयोग करने वाले लोग शायद कभी बीमार ही नहीं पड़ते। किसी व्यक्ति के बीमार पडऩे में रोगाणुओं से ज्यादा उसकी क्षीण रोग प्रतिरोधक क्षमता और आवासीय स्थान का प्रदूषित या संक्रमित होना। रोगाणुओं को जहां पहले केवल बीमारी का वाहक माना जाता था वहीं अब नए शोधें से पता चला है कि हमारे शरीर, त्वचा, आंत और ऐसे ही दूसरे हिस्सों में कुछ बेहद खतरनाक तो कुछ लाभकारी बैक्टीरिया भी पाए जाते हैं। शोध में सामने आया है कि ट्राइक्लोसन का ज्यादा इस्तेमाल लाभकारी बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है।

  • इसी श्रेणी में दूसरा खतरनाक केमिकल है नॉन-स्टिकी कोटिंग मटीरियल जो अब बहुत ज्यादा पॉप्यूलर हो गया है। लोगों में यह भ्रम घर कर गया है कि टेफलॉन परत वाले नॉन-स्टिकी बर्तन लोगों को फैट से बचाते हैं। साइंस मैग्जीन ने इस सप्ताह खबर दी है कि कांग्रेस ट्रंप प्रशासन पर इस बात का दबाव बना रहे हैं कि वो उस रिपोर्ट को सार्वजनिक करें जिसमें खुलासा किया गया है कि किस तरह नॉन-स्टिक कोटिंग, जल प्रतिरोधक एवं दाग रहित परत बनाने में दूषित पानी के साथ पोलीलूरोल्की सब्स्टांस का उपयोग किया जाता है। इन्हीं से फर्नीचर, कारपेट और कपड़े भी बनते हैं।