नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोनावायरस इस सदी का सबसे भयावाह वायरस है जिसने सारी दुनिया को प्रभावित किया है। दुनिया के सभी बड़े देश इस बीमारी से बचाव का प्रभावी टीका बनाने में जुटे हैं, वहीं रूस ने दावा किया है कि उसने सफल कोरोना वैक्सीन तैयार कर लिया है। इस बीच दवा की कंपनियां अब एक ऐसे नए परीक्षण में जुट गई है जो इस वायरस को नष्ट करने के लिए एंटीबॉडी बनाएगी ।

एंटीबॉडी ऐसे प्रोटीन है जिसे शरीर संक्रमण की गिरफ्त में आने के बाद बनाता है। वह वायरस के साथ जुड़ जाता है और उसे नष्ट कर देता है। टीका दूसरे सिद्धांत पर काम करता है ।संक्रमण के बाद टीके को सबसे प्रभावी एंटीबॉडी बनाने में एक या दो महीने लग सकते हैं। प्रयोग से गुजर रहीं दवाइयां विशिष्ट एंटीबॉडी के सांद्र संस्करण देकर उस प्रक्रिया को दूर कर देती हैं और उनका प्रयोगशाला और पशुओं पर परीक्षण में बहुत अच्छा असर रहा है।

उत्तरी कोरोलिना विश्वविद्यालय के विषाणु विज्ञान डॉ मैरोन कोहेन ने कहा किसी टीके को काम करने एंटीबॉडी के विकास कराने में वक्त लगता है। लेकिन जब आप किसी को एंटीबाडी देते है तो उसे तत्काल सुरक्षा मिल जाती है।

समझा जाता है कि इन दवाइयों का एक या अधिक महीने तक असर रह सकता है और यह उच्च संक्रमण जोखिम वाले लोगों जैसे डॉक्टरों और कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को तत्काल प्रतिरक्षा प्रदान कर सकती है।ये दवाइयां प्रभावी साबित हेाती हैं और यदि टीका उम्मीद के अनुसार नहीं आ पाता है या सुरक्षा दे पाता है तो इन दवाओं पर व्यापक इस्तेमाल के लिए विचार किया जा सकता है।