आयकर विभाग ने कर चोरों पर अंकुश के लिए देशभर में एक नया अभियान शुरू किया है. इस अभियान के द्वारा ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है जो बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी विभाग से संपर्क करने से बच रहे हैं।

ये ऐसे लोग हैं जिनके टैक्स रिटर्न के बारे में वेरिफिकेशन के लिए विभाग बार-बार नोटिस भेजता रहा है, लेकिन वे जानबूझकर किसी न किसी बहाने विभाग को जानकारी देने से बच रहे हैं. अब विभाग ने ऐसे टैक्स चोरों की पहचान करने और उनसे बकाया एवं जुर्माना वसूलने के लिए अभियान शुरू किया है।

आयकर विभाग ने अभी तक करीब 6,000 ऐसे मामलों की पहचान की है, जहां लोगों ने कानूनी दंड से बचने के लिए आयकर विभाग की नोटिस को नजरअंदाज किया है.

राजस्व विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक मुंबई एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पता चला है जिसने अपनी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम दिखायी थी, लेकिन उसके खाते में 12 करोड़ रुपये नकद जमा हुए थे. बाद में प्री-सर्वे परीक्षण से पता चला कि उसके खाते में तो 60 करोड़ रुपये तक जमा हुए हैं. ये जानकारी उस व्यक्ति की डायरी से मिली, क्योंकि उसने किसी तरह का बहीखाता मेंटेन नहीं किया है.

ऐसे ही एक मामले में राजकोट गुजरात के एक व्यक्ति ने भी अपनी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम दिखायी थी, लेकिन एक साल में उसके खाते में 10 करोड़ रुपये जमा हुए और 7.5 करोड़ रुपये निकाले गये हैं. इस व्यक्ति को छह नोटिस, 10 एमएसएम अलर्ट भेजा गया और कई अन्य माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया.

इसी तरह राजस्थान के अलवर के एक व्यक्ति ने अपनी सालाना आय 3 से 5 लाख रुपये बतायी थी. लेकिन उसके खाते में 27 करोड़ रुपये तक की नकदी एक साल में जमा हुयी।

राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग को यह पता चला है कि बहुत से लोग जानबूझकर टैक्स रिटर्न के आयकर विभाग के नोटिस को नजरअंदाज कर रहे हैं. इन लोगों को ई-मेल, एएमएस और कागजी नोटिस सब भेजा गया, लेकिन वे विभाग से संपर्क करने को तैयार नहीं हैं।