सेना की रिपोर्ट में दावा किया गया है की ख़राब क़्वालिटी के गोला बारूद खरीदने से न केवल पेसो का है नुकसान हुआ है बल्कि कई घटनाओ में मानवीय छति भी हुई है।

सेना के अंतर्गत की गई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है की पिछले ६ सालो में सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड से जितने रुपये में खराब गोला बारूद खरीदा गया है, उतने में सेना को करीब 100 आर्टिलरी गन मिल सकती थीं जिसे अब रक्षा मंत्रालय को दे दिया गया है ऐसे में जब भारतीय सेना चीन के साथ सीमा सघर्ष की स्थिति में है तब सेना में अब इस इंटरनल रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए

बता दें कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी ) का संचालन रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत ही होता है और ये दुनिया की सबसे पुराने सरकारी ऑर्डिनेंस प्रोडक्शन यूनिट में से एक है. इसी के तहत सेना के लिए गोलाबारूद बनाया जाता है, जिसकी सेना ने आलोचना की है. जिन प्रोडक्ट में खामी पाई गई है, उनमें 23-MM के एयर डिफेंस शेल, आर्टिलरी शेल, 125 MM का टैंक राउंड समेत अलग-अलग कैलिबर की बुलेट्स शामिल हैं.

साल २०१४ से २०२० के बिच जो ख़राब गोला बारूद ख़रीदा गया है उसकी कीमत करीब ९६० करोड़ रूपये पहुँचती है जितने १५० MM की मीडियम आर्टिलरी गन सेना को प्राप्त हो सकती थी।