नई दिल्ली: देश के सर्विस सेक्टर में जुलाई महीने के दौरान भी गिरावट रही। कोरोना वायरस के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में लगने वाले लॉकडाउन ने कंपनियों को परिचालन में कमी लाने और कर्मचारियों की संख्या में कटौती रखने को मजबूर किया जिससे सर्विस सेक्टर में संकुचन बरकरार रहा। इस सेक्टर का देश की जीडीपी में करीब 55 फीसदी का योगदान है। बड़े पैमाने पर यह सेक्टर रोजगार के अवसर भी पैदा करता है जिनका इनकम टैक्स में बहुत योगदान होता है।

जुलाई में इंडेक्स 34.2 अंक रहाबुधवार को जारी एक सर्वेक्षण में यह कहा गया है। IHS मार्केट इंडिया सर्विसिज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जुलाई महीने में 34.2 अंक पर रहा। हालांकि, जून के 33.7 अंक के मुकाबले यह मामूली सुधार में रहा। यह लगातार पांचवां महीना है जब सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में संकुचन रहा है। आईएचएस मार्केट इंडिया के सर्विस सेक्टर के खरीद प्रबंधकों के सूचकांक (PMI) के मुताबिक जुलाई में सूचकांक में मामूली वृद्धि होने के बावजूद सर्विस सेक्टर में लगातार पांचवें महीने संकुचन रहा।

 

PMI का 50 अंक से ऊपर रहना जरूरी
पीएमआई का 50 अंक से ऊपर रहना किसी भी सेक्टर के विस्तार को बताता है जबकि 50 अंक से नीचे रहने पर यह संकुचन को दर्शाता है। आईएचएस मार्केट के अर्थशासत्री लेविस कूपर ने कहा, ‘इतने लंबे समय तक ऐसी बड़ी गिरावट में किसी तरह का व्यापक सुधार आने में सालों नहीं पर कई महीने लग सकते हैं। आईएचएस मार्केट के अनुमान को देखते हुये देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मार्च 2021 में समाप्त होने वाले वर्ष में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का संकेत मिलता है। सर्वेक्षण में भाग लेने वालों ने कोविड- 19 महामारी के कारण समय समय पर लगने वाले लॉकडाउन संबंधी उपायों, कमजोर मांग की स्थिति और कंपनियों में कामकाज का अस्थाई तौर पर निलंबन को सर्विस सेक्टर की गतिविधियों और आर्डर बुक दोनों में आई गिरावट से जोड़ा है।

जुलाई में रोजगार में और कटौती
कुल मिलाकर सकल मांग की स्थिति काफी दबी हुई है, इससे सेवा प्रदाताओं ने जुलाई में रोजगारों में और कटौती की है। रोजगार में कमी की रफ्तार तेज रही है। भागीदारों ने उपयागकर्ताओं की ओर से कमजोर मांग और व्यवसायों के अस्थाई तौर पर बंद होने को इसके लिये जिम्मेदार ठहराया है। सर्विस सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दोनों का संयोजित PMI आउटपुट इंडेक्स जून के 37.8 से घटकर जुलाई में 37.2 अंक पर आ गया। इससे जुलाई महीने के दौरान निजी क्षेत्र के कारोबार और गतिविधियों में और तेज संकुचन की तरफ इशारा मिलता है। इस बीच रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक मंगलवार को शुरू हो गई। छह सदस्यों वाली यह समिति 6 अगस्त को अपना फैसला सुनायेगी