आज ही के दिन चार साल पहले मोदी सर्कार ने नोटेबंदी का ऐलान किया था। विपक्ष सरकार तब से लेकर आजतक इसे मोदी सरकार द्वारा लिया गया गलत फैसला ठहरा रही है।

सरकार का यह मान्यता था की नोटेबंदी का सकारात्मक असर होता। पर देश को उतने अच्छे परिणाम मिले नहीं जिस उम्मीद के साथ सरकार ने इसका निर्णय लिया था।

दरअसल, नोटंबदी की चर्चा आज भी होती है, क्योंकि इससे हर एक भारतीय का सामना हुआ था. 8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी. साथ ही 200, 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी किए गए थे.

नोटबंदी लाने की मोदी सरकार ने कई वजहें बताईं. इसमें कालेधन का खात्मा करना, सर्कुलेशन में मौजूद नकली नोटों को खत्म करना, आतंकवाद और नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने समेत कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने जैसे कई वजहें गिनाई गई थीं.

सरकार का दावा है कि नोटबंदी के बाद लोग कैश के साथ जीने की आदत कम कर रहे हैं. लोग अब कार्ड का इस्तेमाल भी ज्यादा कर रहे हैं. नोटबंदी की वजह से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिला है, अब हर काम में लोग कैशलेस का विकल्प अपना रहे हैं. इसके लिए नोटबंदी का फैसला भी सकारात्मक साबित हुआ.