गुरुवार को हरिद्वार कुंभ की औपचारिक शुरुआत हो गई, लेकिन कोरोना संक्रमण की एक बार फिर बढ़ती रफ़्तार ने श्रद्धालुओं के यहाँ पहुँचने की रफ़्तार को काफ़ी धीमा कर दिया है.

कुंभ जैसी भीड़ न तो सड़कों पर दिख रही है, न ही मेला क्षेत्र में और न ही हरिद्वार के मुख्य घाट हर की पैड़ी पर.

हरिद्वार की सभी सीमाओं पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की गहन जाँच की जा रही है, ताकि कोविड संक्रमित कोई व्यक्ति मेला क्षेत्र और हरिद्वार शहर में प्रवेश न करने पाए.

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है कि बाहर से आऩे वाले, ख़ासकर कोरोना संक्रमण से सबसे ज़्यादा प्रभावित 12 राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट का प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य होगा.

अपर मेला अधिकारी रामजी शरण शर्मा कहते हैं कि कोविड के बढ़ते संक्रमण के दौर में मेला आयोजित कराना चुनौती तो है ही लेकिन कोशिश हो रही है कि स्थानीय जनता और बाहर से आए श्रद्धालुओं के सहयोग से मेला सकुशल संपन्न हो जाए.

बीबीसी से बातचीत में रामजी शरण शर्मा कहते हैं, “चूँकि आस्था का पर्व है, इसलिए जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फ़ैसला किया कि संक्षिप्त रूप में आयोजित किया जाए. इसके लिए ये कोशिश की गई है कि बाहर से कोई संक्रमण लेकर न आने पाए.”

”पहले दिन हमने 12,796 रैपिड एंटीजेन टेस्ट कराए, जिनमें सात लोग पॉज़िटिव आए. उन्हें वापस कर दिया गया. ये टेस्ट उन लोगों के कराए गए, जो कोविड टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट लेकर नहीं आए थे.”

हर की पैड़ी पर दोपहर क़रीब एक बजे राजस्थान से आए कुछ श्रद्धालु गंगा स्नान करके निकले, तो बहुत ही ख़ुश दिखे. उदयपुर के रहने वाले दिवाकर चंद्र ने बीबीसी को बताया कि उनके साथ आए सभी लोगों का रेलवे स्टेशन पर ही कोविड परीक्षण हुआ और सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव निकली.

दिवाकर चंद्र ने बताया, “मैं हरिद्वार कुंभ में दूसरी बार आया हूँ और अन्य जगहों पर भी कुंभ मेले में गया हूँ. इंतज़ाम काफ़ी अच्छे हैं, लेकिन कोरोना का डर तो साफ़ दिख रहा है. बाहर से लोग बहुत कम आ रहे हैं. उसकी वजह भी यही है कि इतनी बंदिशें लगाई गई हैं. हालाँकि ऐसा करना ज़रूरी भी है.”

हर की पैड़ी पर गंगा नदी को पार करने के लिए बने पुलों पर भी गुरुवार को लगभग वैसी ही भीड़ थी, जैसी की यहाँ आम दिनों में होती है. प्रशासन की ओर से मास्क लगाने और सोशल डिस्टैंसिंग अपनाने की अपील करने वाले होर्डिंग्स जगह-जगह लगाए गए हैं.

घाटों पर दूरी बनाकर स्नान करने के लिए गोले भी बनाए गए हैं. लेकिन इन सब नियमों का पालन करते कम ही लोग दिखते हैं. हाँ, मास्क ज़्यादातर लोगों के मुँह पर ज़रूर लगा रहता है. इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि चालान के डर से लोग मास्क लगा रहे हैं.

हर की पैड़ी पर गंगा नदी के बाएँ किनारे पर तो लोग दूर-दूर चलते ज़रूर मिले लेकिन दाहिने किनारे यानी शहर की ओर तमाम दुकानों और खाने-पीने की जगहों के चलते भीड़ भी ज़्यादा थी और सोशल डिस्टैंसिंग से तो लोग जैसे अनजान ही थे. ये अलग बात है कि जगह-जगह लगे लाउडस्पीकरों से इसकी हिदायत दी जा रही थी.

ना ही फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग और ना रही मास्क

बच्चन सिंह रावत की दुकान हर की पैड़ी के दाहिने किनारे पर बिल्कुल चौराहे पर स्थित है. बच्चन सिंह रावत कहते हैं कि कुंभ शुरू भले ही हो गया है, लेकिन कुंभ जैसा फ़ील नहीं आ रहा है.

वो कहते हैं, “कोरोना जब से दोबारा आना शुरू किया है, इससे लोग और भी डर गए हैं. यहाँ इतनी भीड़ तो सामान्य दिनों में होती है, जबकि इससे पहले हुए कुंभ मेलों में यहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं मिलती थी.”

लेकिन दिल्ली से आए युवाओं का एक समूह इन सबसे बेख़ौफ़ दिखा.

एक निजी कंपनी में काम करने वाली सुमेधा का कहना था, “हमने टेस्ट नहीं कराया है, क्योंकि हम लोग चार-पाँच दिन पहले ही यहाँ आ गए थे. इससे पहले ऋषिकेश में थे. कोरोना को लेकर मीडिया ही हाइप क्रियेट कर रहा है.”

उन्होंने कहा, ”चुनावी रैलियों में न कोई सोशल डिस्टेंसिंग है और न ही कोई मास्क लगाए दिख रहा है. अब तो उसका टीका भी आ गया है, तो इतना क्या डरना?”

एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलने वाले हरिद्वार कुंभ में गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं को कोविड-19 की 72 घंटे पहले तक की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट लानी होगी. इस दौरान ज़िले की सभी सात सीमाओं और मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग श्रद्धालुओं की रैंडम सैंपलिंग कर रहा है.

प्रशासन की ओर से कोविड संक्रमित लोगों के इलाज और उनके आइसोलेशन के भी पर्याप्त इंतज़ाम करने का दावा किया गया है.

अपर मेला अधिकारी शरण शर्मा कहते हैं, “हमने 39 अस्पताल बनाए हैं, जिनमें 700 बेड ऐसे हैं, जिन्हें हमने इमरजेंसी के लिए तैयार रखे हैं. 10,000 बेड ऐसे हैं, जिन्हें हमने कोविड सेंटर के रूप में रिज़र्व रखा है.”

उन्होंने बताया कि प्रवेश द्वार पर पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रेट्स और डॉक्टरों की संयुक्त टीम बनाई गई है, जिसमें बाहर से आने वाले लोगों की जाँच की जा रही है.”

देश के दूसरे हिस्सों की तरह उत्तराखंड और हरिद्वार में भी कोरोना संक्रमण काफ़ी तेज़ी से हो रहा है. कुंभ के आयोजन से ठीक पहले हरिपुर कलां स्थित एक आश्रम में 32 कोरोना संक्रमित श्रद्धालुओं के मिलने से हरिद्वार में हड़कंप मच गया.

हालाँकि प्रशासन ने आश्रम को सील कर दिया है और संक्रमित लोगों को आश्रम के विद्यालय में आइसोलेट किया गया है.

प्रशासनिक कार्यालय के पास स्नान पर्व के मौक़ों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग बनाए ज़रूर गए हैं, लेकिन प्रशासन को लगता है कि इस बार के कुंभ में इतनी भीड़ नहीं होने पाएगी कि इनकी ज़रूरत पड़े.

बैरिकेडिंग कर रहे एक कर्मचारी शकील अहमद कहते हैं, “यह व्यवस्था हर कुंभ में होती है. यहाँ भी हर बार की जाती है ताकि भीड़ बढ़ने पर लोगों को लाइन में लगाया जा सके. भीड़ कम ज़रूर है, लेकिन स्नान पर्व के दिन इन बाड़ों की ज़रूरत पड़ ही जाएगी, क्योंकि पर्व पर भीड़ बढ़ेगी.”

हरिद्वार में इस बार कुंभ 12 साल की बजाय 11वें साल में आयोजित हो रहा है, क्योंकि कुंभ आयोजन के लिए अमृत योग का निर्माण एक साल पहले हो रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक़ 83 वर्षों के बाद ऐसा मौक़ा आया है.