गत वर्ष लॉकडाउन के दौरान जब ज्यादातर लोग घरों में बंद थे, राष्ट्रीय महिला आयोग को मिलने वाली घरेलू हिंसा की शिकायतों की संख्या में 2019 के मुकाबले वृद्धि देखने को मिली।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में आयोग को घरेलू हिंसा से संबंधित 2,960 शिकायतें मिली थीं जबकि 2020 में 5,297 शिकायतें प्राप्त हुईं और यह सिलसिला अब भी बरकरार है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में आयोग को महिलाओं के विरुद्ध किए गए अपराध की कुल 19,730 शिकायतें मिलीं जबकि 2020 में यह संख्या 23,722 पर पहुंच गई।

लॉकडाउन खत्म होने के एक साल बाद भी आयोग को हर महीने महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दो हजार से अधिक शिकायतें मिल रही हैं जिनमें से लगभग एक चौथाई घरेलू हिंसा से संबंधित हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से 25 मार्च 2021 के बीच महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की 1,463 शिकायतें प्राप्त हुईं।

पिछले साल कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था लेकिन इसके कारण घरेलू हिंसा की कई पीड़िताएं उनके साथ फंस गई थीं जो यह कृत्य करते हैं।

लॉकडाउन लगाए जाने के बाद आयोग को घरेलू हिंसा की इतनी शिकायतें मिलने लगी थीं कि आयोग ने इसके लिए समर्पित एक व्हाट्सऐप नंबर की शुरुआत की थी।

आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा था कि आर्थिक असुरक्षा, तनाव में वृद्धि, वित्तीय समस्याएं और परिवार की ओर से मिलने वाले भावनात्मक समर्थन की कमी, वर्ष 2020 में घरेलू हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी का कारण हो सकते हैं।

महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ‘पीपुल अगेंस्ट रेप इन इंडिया’ (परी) नामक संस्था की अध्यक्ष हैं।

उनका मानना है कि घरेलू हिंसा की शिकायतों में वृद्धि का एक कारण यह भी हो सकता है कि महिलाओं में अब जागरूकता बढ़ी है और वे इसके बारे में बात करने लगी हैं।