रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी ने बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बहस करने कि चुनौती देते हुए कहा कि वे स्वतंत्र पत्रकारिता करने से हमें नहीं रोक सकते। रायगड जिला स्थित तलोजा जेल से रिहा होने के बाद अर्नब ने यह बयान दिया। उच्चतम न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के कुछ घंटे बाद पत्रकार अर्नब गोस्वामी तलोजा जेल से रिहा कर दिए गए। उन्हें एक इंटीरियर डिजाइनर को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के वर्ष 2018 के एक मामले में गत चार नवंबर को गिरफ्तार किया गया था।

रिहाई के बाद अर्नब गोस्वामी ने कहा, “उस सरकार के द्वारा मेरी गैरकानूनी गिरफ्तारी कराई गई जो यह समझने को तैयार नहीं है कि वह स्वतंत्र मीडिया को पीछे नहीं धकेल सकती। अगर उद्धव ठाकरे को मेरी पत्रकारिता से कोई परेशानी है, तो उन्हें मुझे इंटरव्यू देना चाहिए। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे मेरे साथ उन सभी मुद्दों पर बहस करें जिनसे मैं उनसे सहमति नहीं रखता।”
गोस्वामी रात लगभग साढ़े आठ बजे जेल से बाहर आए। जेल के बाहर जुटे लोगों का उन्होंने वाहन में से हाथ हिलाकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के आभारी हैं। गोस्वामी ने विजय चिह्न प्रदर्शित करते हुए कहा, ”यह भारत के लोगों की जीत है।”

उच्चतम न्यायालय ने 2018 के आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पत्रकार अर्नब गोस्वामी को बुधवार को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि अगर व्यक्तिगत स्वतंत्रता बाधित की जाती है तो यह न्याय का उपहास होगा। शीर्ष अदालत ने विचारधारा और मत भिन्नता के आधार पर लोगों को निशाना बनाने के राज्य सरकारों के रवैये पर गहरी चिंता व्यक्त की।

न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि अगर राज्य सरकारें लोगों को निशाना बनाती हैं तो उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिये उच्चतम न्यायालय है। शीर्ष अदालत ने अर्नब गोस्वामी के साथ ही इस मामले में दो अन्य व्यक्तियों नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख को भी 50-50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। पीठ ने इन्हें यह निर्देश भी दिया कि वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और जांच में सहयोग करेंगे।