कोरोना संक्रमण काल में हिंदी फिल्मों को सीधे ओटीटी पर रिलीज करने के क्रम में अगली फिल्म विद्युत जामवाल की फिल्म ‘खुदा हाफिज’ है। अखबार की एक खबर से निकली इस फिल्म के लिए इसके निर्देशक फारुक कबीर ने काफी रिसर्च की है, उनकी पिछली फिल्म ‘अल्लाह के बंदे’ की प्रेरणा भी उन्हें अखबार में छपी एक खबर से ही मिली थी। ‘खुदा हाफिज’ की टीम ने अमर उजाला के साथ एक वीडियो मुलाकात भी की।

‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में फारुक कबीर शुरू में ही ये कहकर चौंका देते हैं, ‘मेरी अगली फिल्म भी अखबार की एक कटिंग से ही निकली है।’ मशहूर अभिनेता मुराद के नाती (बेटी के बेटे) फारुख कबीर को पढ़ने का बहुत शौक है, खासतौर से रोज का अखबार। वह कहते हैं, ‘अखबार मेरे लिए एडिक्शन जैसा है। हाथ में सुबह अखबार न आए तो दिन खाली खाली लगता है। कोरोना के दौरान मुंबई में लंबे अरसे तक अखबार घर नहीं पहुंच पाए तो बड़ा खाली खाली सा फील होता रहा!

फारुक का उत्तर प्रदेश से करीबी नाता रहा है। उनके नाना मुराद रामपुर के रहने वाले थे। वह बताते हैं, ‘रामपुर मेरा बहुत आना जाना रहा है। वहां की रजा लाइब्रेरी दुनिया की सबसे मशहूर लाइब्रेरीज में से एक है। ज्ञान का अथाह भंडार है ये। मुझे लगता है पढ़ने का शौक मुझे अपने ननिहाल से ही आया।’

पूरे देश की 27 हजार किमी की यात्रा कर चुके फारुक कबीर कहते हैं, ‘अखबार के अलावा जिस दूसरी चीज ने मुझे जिंदगी में बहुत कुछ सिखाया है, वह है मेरी यात्राएं। मैंने अपनी एक सीरीज के लिए पूरा देश घूमा है। गांवों में लोगों से मिला हूं। सड़कों के किनारे ढाबों पर खाना खाया है और खुले आसमान के नीचे सोया हूं। यहां भी अखबार ने मुझसे दोस्ती निभाई। देश का हर रंग उस इलाके के अखबार अपने में संजोए रहते हैं। किसी क्षेत्र को मुझे जानना होता है तो वहां जाने से पहले मैं वहां के अखबार पढ़ने शुरू कर देता हूं।’