घिटोरनी गांव स्थित कॉल सेंटर 15 मार्च की रात डकैती डालने वाले गैंग के सभी छह बदमाशों को गिरफ्तार करने में वसंतकुंज साउथ थाना पुलिस ने सफलता पाई है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन इंजीनियर हैं। गिरफ्तार आरोपी सौरभ, रघुविन्द्र, मंजीत कुमार, समित कुमार, संजय कुमार और मुदासिर नज़ीर के पास से तीन लैपटॉप, तीन महंगी घड़ियां, एक आईपैड, एक कैमरा बरामद किया गया है। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी डकैती डालने के अलावा खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर छापेमारी के नाम पर ठगी की वारदात को भी अंजाम देते थे।

पुलिस उपायुक्त इंगित प्रताप सिंह ने बताया कि 15 मार्च की रात को घिटोरनी गांव में कॉल सेंटर में डकैती पड़ी थी। कॉल सेंटर के मालिक सुशांत राज ने अपनी शिकायत में बताया कि चार लोग एक गाड़ी से कॉल सेंटर के गेट पर पहुंचे। आरोपियों ने बंद गेट को तोड़ दिया और कॉल सेंटर के अंदर चले आए। आरोपियों ने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी की पिटाई कर उसे बंधक बना लिया। इसके बाद आरोपियों ने कॉल सेंटर का दूसरा गेट तोड़ा और वहां से सामान लूट लिया। इसी दौरान सुशांत की नींद खुल गई तो आरोपियों ने उन्हें खुद को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए छापा पड़ने की बात कही और वहां से फरार हो गए। इंस्पेक्टर अजय कुमार नेगी, एसआई मुकेश, एएसआई रामनिवास की टीम ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की।

पुलिस ने मौके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, सर्विलांस और मुखबिरों से जानकारी जुटाई। लेकिन, कोई सफलता नहीं मिली। पुलिस ने सुरक्षाकर्मी और मालिक से दोबारा पूछताछ की तो पता चला कि लॉकडाउन के बाद से ही दफ्तर बंद है। लेकिन, वे लोगों के साक्षात्कार के लिए नोएडा स्थित दफ्तर गए थे। पुलिस ने जिन आवेदकों के साक्षात्कार लिए गए थे, उन सभी से पूछताछ की। इस दौरान एक शख्स समित कुमार का मोबाइल नंबर वारदात वाली रात को घटनास्थल वाली जगह पर सक्रिय पाया गया। पुलिस ने समित को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मामला खुल गया और पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। जांच में पता चला कि समित पीड़ित का पुराना दोस्त है और उसे पहले से जानता था।

आरोपियों ने बताया कि उन्होंने स्पेशल-26 फिल्म देखने के बाद इसी तर्ज पर लोगों से ठगी की योजना बनाई। आरोपियों में मुदासिर नज़ीर खुद को एसीपी और रघुविन्द्र इंस्पेक्टर जबकि अन्य उनकी टीम के रूप में खुद को प्रदर्शित करते थे। आरोपी पहले किसी संदिग्ध कॉल सेंटर का चयन करते थे। वेब और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर उसके बाद जानकारी जुटाते थे। इसके बाद खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कॉल सेंटर में फर्जी छापेमारी करते हुए मालिकों से समझौता करने के नाम पर रुपये ऐंठते थे। घिटोरनी में भी वे इसी तरह वारदात करने गए थे लेकिन सेंटर बंद होने पर उन्होंने डकैती को अंजाम दिया था। आरोपियों में शामिल मुदासिर नज़ीर, समित कुमार और मंजीत कुमार इंजीनियर हैं। जबकि सौरभ दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक है। रघुविन्द्र भी स्नातक हैं। उसके पिता दिल्ली पुलिस में काम कर चुके हैं। संजय 12वीं पास है और एक म्यूजिक ग्रुप के लिए गिटार बजाता है।