जाने-माने गायक उदित नारायण का मानना है कि संगीतकार नदीम-श्रवण फेम श्रवण राठौड़ को तेजी से जानलेवा साबित हो रहे कोरोना महामारी के बीच कुंभ मेले में नहीं जाना चाहिए था. एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत करते हुए उदित नारायण ने कहा कि कोरोना जैसी घातक महामारी के दौरान लाखों लोगों के बीच श्रवण को कुंभ मेले में शामिल नहीं होना चाहिए था. “एक तरह से कहा जा सकता है कि कुंभ में जाना श्रवण के लिए जानलेवा साबित हुआ”, उदित ने अपने बहुत अजीज दोस्त रहे श्रवण की कोरोना से हुई मौत को लेकर बड़े ही अफसोस भरे लहजे में कहा.

उदित नारायण ने बताया, ” कुंभ मेले में शामिल होने के दौरान श्रवण ने मुझे एक दिन अचानक वहां से फोन किया था और इस बात की जानकारी दी थी कि वे इस वक्त अपनी पत्नी के साथ कुंभ मेले में आए हुए हैं. उनकी ये बात सुनकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ था कि आखिर इतनी बड़ी महामारी के बीच वे वहां पर क्यों गये है. लेकिन उस वक्त मैंने श्रवण से लाखों की भीड़ के बीच कुंभ में नहीं जाने की बात को बड़े ही हल्के अंदाज में कहा और उन्हें अपना ख्याल रखने की सलाह दी थी. कुंभ में शामिल होने को लेकर मैंने उस वक्त श्रवण को ज्यादा कुछ इसीलिए नहीं कहा था क्योंकि मुझे लगा कि कहीं मेरी कोई बात उन्हें बुरी न लग जाए.”

उदित नारायण ने इस बात का भी खुलासा किया कि श्रवण के दोनों बेटों – संजीव और दर्शन ने उन्हें महामारी के बीच कुंभ में नहीं जाने से बार-बार रोकने की कोशिश की थी. उदित कहते हैं, “कुंभ के दौरान श्रवण से बातचीत होने के 3-4 दिन बात मैंने उनके बड़े बेटे श्रवण को फोन लगाया तो मुझे पता चला कि वहां से लौटने के बाद श्रवण और उनकी पत्नी दोनों को कोरोना हो गया है और अस्पताल में भर्ती श्रवण की हालत बेहद नाजुक है. ये सुनकर मुझे बहुत अफसोस हुआ था.”

उदित कहते हैं, ‘संजीव ने मुझे बताया कि खुद उन्होंने और उनके छोटे भाई दर्शन ने अपने पिता को इस बढ़ती महामारी के बीच कुंभ मेले में नहीं जाने का बहुत आग्रह किया था. दोनों ने गिड़गिड़ाने की हद तक पापा औए मम्मी को इस बार कुंभ में शामिल नहीं होने की सलाह दी थी. लेकिन इसके बावजूद दोनों नहीं माने और हम सब जानते हैं कि फिर क्या हुआ. काश की श्रवण ने‌ अपने बेटों की बात सुन ली होती और खुद को कुंभ मेले में जाने से रोक लिया होता…”.

उदित कहते कि उन्होंने श्रवण को पहले से ही डायबिटीज, किडनियों की समस्या और हृदय संबंधित बीमारियां होने के बारे में सुन रखा था और ऐसे में श्रवण को तो बिल्कुल भी कुंभ मेले में शामिल नहीं होना चाहिए था.

नदीम-श्रवण ने भले ही एक गायक के तौर पर हमेशा से ही कुमार शानू को तवज्जो दी हो और एक उम्दा गायक उदित नारायण को गायिकी का बहुत कम मौका दिया मगर श्रवण से उनकी दोस्ती बहुत गहरी थी. उदित कहते हैं, “श्रवण बड़े भाई की तरह मेरा ख्याल रखते थे और अक्सर मुझसे कहा करते थे कि अगर मुझे किसी तरह की तकलीफ या फिर किसी तरह की कोई जरूरत हो तो उन्हें जरूर बताएं. वो हर किसी की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे. उनके इस गुण से मैं ही नहीं, सभी बहुत प्रभावित थे.”

श्रवण के बारे में भावुक होकर उदित नारायण ने कहा, “मैंने उनके जैसा मिलनसार, विनम्र और हंसमुख इंसान नहीं देखा. खुद हंसना और दूसरों तो हंसाते रहना उनका मूल स्वाभाव था. मैं एक दोस्त और एक बड़े भाई के रूप में श्रवण को  हमेशा मिस करूंगा.”