दाम बढ़ने के कारण: 1000 फीट की बजाय ला रहे 300 फीट बजरी

असर: तीन लाख रुपए तक खर्च बढ़ा

कार्रवाई: ओवरलोड पर 61 लाख रुपए का जुर्माना

मकानबनाना अब महंगा हो गया है, ईंट से लेकर निर्माण में लगने वाली अन्य महत्वपूर्ण सामग्री के भाव में तेजी से उछाल आया है, इसका बड़ा कारण ओवरलोड वाहनों पर विभाग की सख्ती माना जा रहा है। अब ट्रांसपोर्टर काफी हद तक वाहनों को अंडरलोड ही चला रहे हैं। इसके चलते वह पहले की तुलना में कम सामान ढो रहे हैं। सप्लायर्स और ट्रांसपोर्टर्स ने मीटिंग कर मैटेरियल के रेट निर्धारित कर दिए हैं, क्योंकि ट्रांसपोर्टर पहले जहां एक बार में जितना सामान ले जाते थे, उतना सामान वह अब तीन बार में लेकर जा रहे हैं, इससे उन्हें नुकसान हो रहा है, इसकी भरपाई वह आमजन से ही कर रहे हैं।

ट्रक चालकों का कहना है कि यह सरकार के फैसले का असर है, पिछले दिनों केंद्र सरकार ने ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा कसने के आदेश दिए थे। इसके बाद वाहन चालकों ने खुद ही वजन काफी हद तक कम कर दिया। जितना वजन ढोने की अनुमति है, उतना ही वजन ले जा रहे हैं, ताकि किसी तरह का इंझट रहे। ट्रांसपोर्टरों के अंडरलोड वाहनों के चलाने का असर ये हुआ है कि मकान बनाने के लिए जिसने 10 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाया है, रेट बढ़ने से अब उसके दाम 12 से 13 लाख लगने तय हैं। बता दें कि जिले में 20 दिन के अंतराल में ही बजरी, रेत, सीमेंट, ईंट आदि के दामों में जबर्दस्त उछाल आया है। ईंट जहां 500 रुपए प्रति हजार बढ़ी है, वहीं सीमेंट का एक बैग 60 रुपए तक महंगा हो गया है। इससे मकान बनाने वालों का बजट बिगड़ गया है।

सामान पहले रेट अब रेट

बजरी24रुपएफीट 33रुपएफीट

सरिया 34रुपएकिलो 42रुपएकिलो

सीमेंट 270रुपए/बैग 330रुपए/बैग

रेत 15रुपएफीट 20रुपएफीट

डस्ट 25रुपएफीट 34 रुपए फीट

ईंट 4000/हजार4500/हजार

पीओपी 150रुपए/बैग170रुपए/बैग

ठेकेदार जगदीश बताते हैं कि 120 गज जगह में सिंगल स्टोरी बनाने में करीब 10 लाख रुपए खर्च आता है। इस तरह रेट बढ़ने पर दो से तीन लाख रुपए अधिक खर्चा सकता है। वहीं सेक्टर-14 में मकान निर्माण कर रहे व्यक्ति ने बताया कि वे जब मकान का निर्माण करने लगे थे, तब रेट कुछ और थे। वे पहले से मेटेरियल का सौदा कर चुके थे। एडवांस में राशि दी गई थी, पहला डंपर तो कम रेट पर गया था, लेकिन दूसरे डंपर के वह अधिक पैसे मांग रहा है। सीमेंट कारोबारी दीपक ने बताया कि सीमेंट के दाम और भी बढ़ने की उम्मीद है। 270 रुपए प्रति बैग से बढ़कर रेट 330 रुपए तक पहुंच गए हैं। सोमवार तक 10 रुपए प्रति बैग बढ़ने के आसार बने हुए हैं।

आरटीए सचिव प्रधुमन सिंह ने बताया कि अंडरलोड गाड़ियां चलवाने के लिए आरटीए टीम ने भी सख्ती बरती है। एक माह में 61 लाख रुपए का जुर्माना वसूल रहे हैं, जबकि पिछले साल 40 लाख रुपए तक जुर्माना वसूलते थे। इस तरह प्रशासन की सख्ती से ओवरलोड चलाने वालों को भारी नुकसान हो रहा है।

मेटेरियल सप्लायर दीपक कुमार बताते हैं कि रेत, बजरी, डस्ट और अन्य सामान बढ़ने का एक कारण है कि ओवरलोड पर शिकंजा ज्यादा कसा जा चुका है। अंडरलोड के तहत गाड़ी में 16 टन माल ढुलाई कर सकते हैं, जबकि ओवरलोड में यह भार 50 टन तक पहुंच जाता है। एक गाड़ी से 3 चक्करों का माल एक ही चक्कर में ढुलाई हो जाता है। इससे ट्रांसपोर्ट में बचत रहती थी। अब उसी माल को तीन चक्करों में उठाने से ट्रांसपोर्ट किराया बढ़ गया है। इसका खर्चा निर्माण सामग्री से ही निकाला जा रहा है।