नई दिल्ली. ग़रीब कल्याण रोज़गार अभियान (Garib Rojgar Kalyan Abhiyan) 6 राज्यों बिहार,झारखंड, मध्य प्रदेश,ओडिशा,राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अपने गांवों में लौट आए प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मिशन मोड पर कार्रवाई कर रहा है. इस अभियान के जरिए इन 6 राज्यों के 116 जिलों में आजीविका (Earning) के अवसर उपलब्ध कराते हुए ग्रामीणों को सशक्त किया जा रहा है. आपको बता दें कि कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर गांवों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ही प्रभावित नागरिकों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है. यह अब लौटकर अपने गांव में ही रहने का फैसला कर चुके लोगों के लिए नौकरियों और आजीविका हेतु एक लंबी अवधि की पहल है.

योजना की जानकारी के लिए इन जगहों पर करें संपर्क-प्रवासी मजदूरों को अगर इस योजना के बारे किसी तरह की जानकारी चाहिए तो वे नजदीकी ग्राम पंचायत या विकास खंड कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं.केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, जो कि इस अभियान के लिए नोडल मंत्रालय बनाया गया है, के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस रोजगार अभियान में काम कराने से लेकर मजदूरी के भुगतान का काम, सब राज्य सरकार के अधिकारी ही करेंगे. इसलिए काम पाने के इच्छुक व्यक्ति सीधे केंद्र सरकार से संपर्क साधने के बजाय अपने ब्लॉक या तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क में रहें.

अब तक मिला 21 लोगों को रोज़गार-ग़रीब कल्याण रोज़गार अभियान के सातवें सप्ताह तक कुल 21 करोड़ श्रमदिन रोजगार उपलब्ध कराया गया है और इस पर अब तक 16,768 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.

इस अभियान के उद्देश्यों को पूरा करते हुए 77,974 जल संरक्षण ढांचों, 2.33 लाख ग्रामीण घरों, 17,933 मवेशियों के लिए आवास, 11,372 कृषि तालाबों, और 3,552 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों सहित बड़ी संख्या में संरचनाओं का निर्माण किया गया है.

इसके अलावा, इस अभियान के दौरान जिला खनिज निधि के माध्यम से 6,300 कार्य किए गए हैं, 764 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की गई है, और 25,487 उम्मीदवारों को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है.

ग़रीब कल्याण रोज़गार अभियान (जीकेआरए) की अब तक की सफलता को 12 मंत्रालयों / विभागों और राज्य सरकारों के सम्मिलित प्रयासों के रूप में देखा जा सकता है, जो प्रवासी श्रमिकों और ग्रामीण समुदायों को अधिकतम लाभ प्रदान कर रहे हैं.

125 दिन का अभियान, खर्च होंगे 50 हजार करोड़ रुपये-  पीएमओ के अनुसार, 125 दिनों का यह अभियान मिशन मोड में चलाया जाएगा. 50 हजार करोड़ रुपये के फंड से एक तरफ प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए विभिन्न प्रकार के 25 कार्यों को तेजी से कराया जाएगा. वहीं दूसरे ओर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा.

यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों/विभागों- ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि का एक समन्वित प्रयास होगा.