कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के लेकर दुनियाभर के लोग चिंतित हैं। सभी को इंतजार है तो बस यही कि जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन उपलब्ध हो जाए। वैक्सीन तैयार करने में यूं तो सालों लग जाते हैं, लेकिन कोरोना महामारी जैसी स्थिति में इसकी वैक्सीन विकसित करने को लेकर बहुत ही तेजी से काम हो रहा है। दुनियाभर में 200 से ज्यादा वैक्सीन प्रोजेक्ट पर काम हो रहे हैं, जिनमें से 21 से ज्यादा वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के फेज में हैं। फिलहाल यही मानकर चला जा रहा है कि कोरोना महामारी पर नियंत्रण में वैक्सीन ही कारगर उपाय साबित होगी। लेकिन कुछ विशेषज्ञ वैक्सीन को नाकाफी भी मान रहे हैं।

अमेरिका के वरिष्ठ कोरोना विशेषज्ञ और व्हाइट हाउस कोरोना वायरस टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. एंथनी फाउची ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन संक्रमित होने के खतरे को सिर्फ 50 या 60 फीसदी तक ही रोक सकती है। उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के उपायों की जरूरत तब भी बनी ही रहेगी।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फाउची ने कहा कि अगर महामारी को नियंत्रित करना है तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के उपाय भी जरूरी रहेंगे। उन्होंने कहा, “वैक्सीन के बारे में हमें अभी यह नहीं पता है कि यह कितना प्रभावी होगा।”

कोरोना वायरस की वैक्सीन की बात करें तो दुनियाभर में 210 से ज्यादा प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इनमें 21 से ज्यादा वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल में है। अमेरिका के अलावा भारत, ब्रिटेन, चीन, रूस आदि देश वैक्सीन बनाने के काफी नजदीक हैं। रूस ने 12 अगस्त को दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन का पंजीकरण कराने की बात कही है और अक्तूबर में टीकाकरण शुरू कराने का दावा कर रहा है। फिलहाल लोगों को कोरोना की वैक्सीन का इंतजार है।