दिल्ली भाजपा महामंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बुधवार को पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये कहा कि नगर निगमों के फंड जारी करने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आज किये गये आदेश ने भाजपा द्वारा नगर निगमों के फंड के लिये चलाये जा रहे आंदोलन को सत्यापित कर दिया है। पत्रकारवार्ता में पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर निर्मल जैन, नेता सदन प्रवेश शर्मा, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के स्थायी समिति अध्यक्ष छैल बिहारी गोस्वामी, नेता सदन योगेश वर्मा एवं दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर उपस्थित थे।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भाजपा लगातार कहती रही है कि अपनी द्वेषपूर्ण राजनीति के चलते अरविन्द केजरीवाल सरकार ने गत 6 वर्षों से नगर निगमों के संवैधानिक फडों में न तो चौथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिश अनुसार वृद्धि की है और न ही मुनिस्पिल रिफोर्म कमेटी की सिफारिशों के अनुसार वृद्धि की है। इसके अलवा हर वर्ष अरविन्द केजरीवाल सरकार बजट अनुसार तय नगर निगमों के फंड भी पूरे नहीं देती है। इसी सबके चलते नगर निगमों के लगभग 13000 करोड़ रूपये दिल्ली सरकार द्वारा देय हैं।

भाजपा महामंत्री ने कहा कि नगर निगमों ने अपने फंड के लिये दिल्ली उच्च न्यायालय में विभिन्न याचिकायें दायर की हैं और उन्हीं में से एक याचिका वर्तमान वित्त वर्ष के फंड को जारी करवाने की मांग को लेकर थी। माननीय उच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसला करते हुये दिल्ली सरकार की सभी दलीलों को खारिज किया है और आदेश किया है कि आगामी एक सप्ताह में तीनों नगर निगमों को उनका वित्त वर्ष 2020-21 के तय फंड का बकाया जो 991 करोड़ रूपये बैठता है जारी करे।

श्री मल्होत्रा ने कहा कि आज माननीय उच्च न्यायालय के आदेश से न सिर्फ यह सत्यापित हुआ है कि अरविन्द केजरीवाल सरकार राजनीतिक द्वेष से नगर निगमों के फंड रोके बैठी है बल्कि यह भी साफ हो गया है कि दिल्ली वालों की नागरिक सुविधाओं की समस्या हो या फिर नगर निगम कर्मचारियों की वेतन समस्या इस सबके लिये अरविन्द केजरीवाल सरकार जिम्मेदार एवं जवाबदेह है।