देश के मशहूर शायर राहत इंदौरी ने मंगलवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया. पूरी दुनिया में अपनी शायरी से दिलों पर राज करने वाले हर दिल अज़ीज़ राहत इंदौरी ने 70 साल की उम्र में 11 अगस्त को आखिरी सांस ली. उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई. वो कोरोना पॉजिटिव भी थे. राहत इंदौरी का जाना देश के लिए एक बड़ी हानि जैसा है. हर कोई उन्हें अपने अंदाज में याद कर रहा है, श्रद्धांजलि दे रहा है. राहत इंदौरी साहब के करीबियों में रहे कवि कुमार विश्वास ने एक विशेष लेख के जरिए अपने हमसाज़ और दोस्त को याद किया है.

*एक कलंदर का जाना*

राहत भाई आप तो कहते थे कि….

”वबा फैली हुई है हर तरफ,

अभी माहौल मर जाने का नई..!”

तो फिर इतनी जल्दी? ऐसे? हे ईश्वर! बेहद दुखद! इतनी बेबाक़ ज़िंदगी और ऐसा तरंगित शब्द-सागर इतनी ख़ामोशी से विदा होगा, कभी नहीं सोचा था! शायरी के मेरे सफ़र और काव्य-जीवन के ठहाकेदार क़िस्सों का एक बेहद ज़िंदादिल हमसफ़र हाथ छुड़ा कर चला गया ”मैं मर जाऊं तो मेरी इक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना…!”