अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी जाबिर मोती का ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अमेरिका प्रत्यर्पण किया जाना है. ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और ब्लैकमेलिंग के आरोपों का सामना करने के लिए अमेरिका प्रत्यर्पण को जाबिर मोती ने लंदन हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. लंदन हाईकोर्ट ने मोती की याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

पाकिस्तानी नागरिक जाबिर मोती को जाबिर मोतीवाला और जाबिर सिद्दीक के नाम से भी जाना जाता है. जाबिर मोती फिलहाल साउथ वेस्ट लंदन की वंड्सवर्थ जेल में बंद है. वेस्टमिंस्टर की अदालत ने पिछले साल फरवरी में उसके प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी थी. जाबिर मोती ने वेस्टमिंस्टर कोर्ट के फैसले को लंदन हाईकोर्ट में चुनौती दी है. गौरतलब है कि अमेरिका ने प्रत्यर्पण के लिए अपनी अपील में कहा था कि मोती सीधे दाऊद को रिपोर्ट करता है जो घोषित आतंकवादी है और साल 1993 के मुंबई सीरीयल ब्लास्ट का वांछित है.

जाबिर मोती की याचिका पर सुनवाई करते हुए लॉर्ड जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे ने गुरुवार को यह टिप्पणी किया कि यह मामला सीधा नहीं है. लंदन हाईकोर्ट में मोती की अपील पर सुनवाई कर रही पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. मोती के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल पर आतंक से जुड़े आरोप बढ़ाए जाने का खतरा है.

वकील के मुताबिक आतंक से जुड़े आरोप में मोती को अमेरिकी कानून के तहत परोल के बिना आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने का खतरा होगा. यह मोती के मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा. उन्होंने मोती के गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करने का भी हवाला दिया और कहा कि मेंटल असेसमेंट के दौरान मोती के वकील ने कहा कि उसकी मां की मौत के बाद सभी आशाएं टूट गई थीं.